आदिवासी नायक रुमाल्या नाईक का स्मृति दिवस मनाये
22 मई 2024 को शहादा के वडगांव में वीरनायक रुमाल्या नाईक उत्सव समिति एवं ग्राम पंचायत वडगांव के सहयोग से ग्रामवासियों ने पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार वीर नायक रुमाल्या नाईक का स्मृति दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया!
प्रारंभ में, रुमाल्या नाइक की जुलूस उनकी समाधि स्थल से होली चौक तक ले जाया गया, पारंपरिक परंपरा के अनुसार, ढोल, ताड़ी और तुरही बजाकर और आदिवासी क्रांतिकारी नायकों की जय-जयकार करते हुए गांव में जुलूस निकाला गया। इसके बाद चौक पर सभा की गयी!
बैठक की शुरुआत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए वाहरू सोनवणे, वनिता पटले, गणेश वाळवी, चुन्नीलाल ब्राह्मणे और योगेश मोगरे ने "धरती वंदन गीत---- नहीं भूलजी अम्हू नहीं भूलजी या धरती माता गीता" से की।
साहित्यकार वाहरू सोनवणे, पूर्व जनपद समिति अध्यक्ष वनिता पाटले, इंजीनियर जेलसिंह पावरा, सामाजिक कार्यकर्ता भीम सिंह वलवी, प्रकाश नावड़े जनपद सदस्य, आदि भी उपस्थित थे !
उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने वीर बहादुर वीरनायक वीरभद्र, वीरनायक रुमाल्या नायक, झलकारी देवी, रानी दुर्गावती, गुलाम बाबा, अबरसिंह महाराज.खाज्या नायक, बिरसा मुंडा, झलकारी देवी, रानी दुर्गावती, गुलाम बाबा, अबरसिंह महाराज आदि क्रांतिकारी नायकों के इतिहास के बारे में भी जानकारी दी।
वही वाहरू सोनवाने ने व्यवस्था पर अफसोस जताते हुए कहा कि आज भी ऐसे कई आदिवासी दलित मजदूर समूहों के क्रांतिकारियों का इतिहास दबा दिया गया है!
क्रांतिकारियों ने यहां अंग्रेजों के खिलाफ अत्याचार के खिलाफ विद्रोह किखिरी सांस तक संघर्ष किया और अंत में अत्याचारी शासन द्वारा फांसी पर चढ़ा दिए गए इस शासन के शासको ने डाकू चोर लुच्चा लफंगा कह के क्रांतिकारियों के इतिहास को छुपाया समाज के सामने प्रस्तुत करने के लिए अपमानजनक विशेषण के रूप में उपयोग किया जाता है और महापुरुषों का इतिहास भी ना मिला ऐसा जानबुझ के बोला जाता है'!
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मणिपुर, मध्य प्रदेश, झारखंड, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और कई अन्य राज्यों के आदिवासी बहुल हिस्सों में आदिवासियों को उनके स्थानों से विस्थापित किया जा रहा है, उनकी माताओं, पत्नियों, बहनों पर क्रूर अत्याचार किए जा रहे हैं, उन्हें मार डाला जा रहा है, कई जंगल जैसे हसदेव ने नष्ट कर दिया, ऐसा करके उन्हें राजनीतिक नेता के दोस्तों के हाथों में सौंपा जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण सुविधाओं की कमी जानबूझकर पैदा की जा रही है। आदिवासी संस्कृति को बड़े पैमाने पर विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है. आदिवासी युवाओं को नशे की ओर धकेला जा रहा है और अपने राजनीतिक लाभ के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। शासन आदिवासी समुदाय, जिसने कभी भी धर्म के नाम पर लड़ाई नहीं लड़ी, को हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर शामिल करके विकास प्रक्रिया को लंबा कर रहा है। आदिवासियों को वनवासी बनाने की साजिश चल रही है, जिन्हें आदिवासियों ने रहने नहीं दिया, उन्हें फर्जी आदिवासी जाति प्रमाण पत्र दिया जा रहा है और वास्तविक आदिवासियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में...आदिवासियों में धनगरों को आरक्षण न देने को लेकर हाई कोर्ट में जो केस दायर किया गया था, उसे अंत तक लड़ा गया नंदुरबार जिला परिषद उपाध्यक्ष "सुहासदादा नाइक" का वडगांव क्षेत्र के नागरिकों द्वारा शॉल एवं श्रीफल देकर सम्मान किया गया. उन्होंने सभी को एक विस्तृत कहानी बताई है कि अदालती लड़ाई की शुरुआत से लेकर मामले के नतीजे तक खुद को संभालने तक की प्रक्रिया में कौन शामिल था, उन्हें किन सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया और भावना व्यक्त की कि वह अपनी अंतिम सांस तक समाज के लिए लड़ते रहेंगे वचन दिया!
अंत में कार्यकर्ताओं ने "वाहरू सोनवणे" द्वारा रचित गीत (चलो उठो आगे बढ़ो जुल्मशाही को करो बर्बाद, एक साथ आवाज दो आदिवासी-दलित जिंदाबाद,) गाकर कार्यक्रम का समापन किया।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संचालन गोविंद पावरा ने किया। मुख्य अतिथियों का परिचय ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच और सदस्यों ने दिया। विजय सिंह भील, रमेश जाधव, संजय पावरा, दीपक गोडसे, जालिंदर पावरा, राहुल वलवी, आनन वलवी, दिलीप वलवी, सुभाष पावरा, गणेश पावरा, ज्योतिताई वलवी, (प्रशांत)पवार, नवल पावरा, सुभाष भील मंदाना आत्माराम भील (कलमाड़ी) "राजू भील रुमाला नायक (वाडगांव) के वंशज" अजित वलवी, प्रा. विजय वलवी, कावा पाटले, काश पवार (मंदाना सतपुड़ा उद्योग समूह के अध्यक्ष) आदि ने प्रयास किये,



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