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🇮🇳 बिरसा आर्मी का निवेदन — सीजेआई भूषण गवई और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के समर्थन में 🌿⚖️

 🇮🇳 बिरसा आर्मी का निवेदन — सीजेआई भूषण गवई और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के समर्थन में 🌿⚖️


📍प्रतिनिधि, शिरपुर


देश की न्याय व्यवस्था के सर्वोच्च पद पर आसीन सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति भूषण गवई पर हाल ही में अदालत में सुनवाई के दौरान हुए जूता हमले और प्रसिद्ध पर्यावरणविद, शिक्षाविद एवं लोकतांत्रिक नेता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हुई गिरफ्तारी के विरोध में, बिरसा आर्मी संगठन ने शिरपुर में प्रांत अधिकारी को निवेदन सौंपा।


इस निवेदन के माध्यम से संगठन ने महामहिम राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय से न्याय की मांग करते हुए कहा कि देश में न्याय और लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।




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⚖️ न्यायमूर्ति भूषण गवई पर हमले का विरोध


निवेदन में कहा गया कि देश के न्याय तंत्र के सर्वोच्च प्रतिनिधि, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति भूषण गवई, जो देश के प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति को शपथ दिलाने का संवैधानिक अधिकार रखते हैं, उन पर अदालत के अंदर जूता फेंकने जैसी घटना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है।


बिरसा आर्मी ने अपने निवेदन में कहा कि—


> “यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि भारत की न्याय प्रणाली, संविधान और लोकतंत्र की गरिमा पर हमला है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और हमलावर वकील पर देशद्रोह का मामला दर्ज कर उसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में कठोर सजा देने की मांग करते हैं।”




इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली इस हरकत को लेकर सामाजिक संगठनों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है।



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🌱 सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का विरोध और रिहाई की मांग


पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित सोनम वांगचुक की रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत गिरफ्तारी को बिरसा आर्मी ने पूरी तरह अवैध और लोकतंत्र विरोधी कदम बताया है।


संगठन ने कहा कि—


> “सोनम वांगचुक हमेशा अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते हैं।

वे लद्दाख क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, जो पूरी तरह वैधानिक और शांतिपूर्ण है।

ऐसे में उन पर रासुका लगाना संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।”




बिरसा आर्मी ने मांग की है कि सोनम वांगचुक पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून तत्काल वापस लिया जाए और उन्हें बिना शर्त रिहा किया जाए।



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🏛️ लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जागरूक समाज की आवश्यकता


बिरसा आर्मी ने अपने निवेदन में आगे कहा कि आज का समय ऐसा है जब देश को न्यायपालिका और लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए नागरिक समाज को आगे आने की जरूरत है।


न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखना हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन जब न्याय के प्रतीक ही हमले का शिकार बनते हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत हमला होता है बल्कि राष्ट्र के संविधान पर सीधा प्रहार होता है।


संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सरकार को भी ऐसे संवेदनशील मामलों में जल्द और न्यायपूर्ण कार्रवाई करनी चाहिए ताकि जनता का भरोसा बना रहे।



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📸 निवेदन सौंपते समय उपस्थित सदस्य


शिरपुर में प्रांत अधिकारी को निवेदन सौंपते समय मनोज पावरा और विजय पावरा सहित बिरसा आर्मी संगठन के पदाधिकारी मौजूद थे।

उन्होंने संगठन की ओर से यह निवेदन सौंपा और मीडिया से बातचीत में कहा कि –


> “हम संविधान और न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं।

लेकिन जब न्याय और पर्यावरण की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जाती है, तो बिरसा आर्मी जैसी संस्थाएं खामोश नहीं बैठेंगी।”





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🌿 पर्यावरण और न्याय – एक समान संघर्ष


सोनम वांगचुक का जीवन और संघर्ष हमें यह सिखाता है कि पर्यावरण की रक्षा और सामाजिक न्याय, दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

जहां एक तरफ न्यायमूर्ति भूषण गवई जैसे लोग न्याय के मंदिर की प्रतिष्ठा बनाए रखते हैं, वहीं दूसरी तरफ सोनम वांगचुक जैसे लोग प्रकृति और समाज के लिए आवाज़ उठाते हैं।


इन दोनों पर हमला या अत्याचार, वास्तव में भारत के संविधान और उसके मूल्यों पर हमला है।

बिरसा आर्मी जैसे संगठन इस तरह के अन्याय के खिलाफ हमेशा खड़े रहेंगे।



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💪 जनसमर्थन की अपील


बिरसा आर्मी ने देशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और न्याय, लोकतंत्र तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करें।


> “अगर हम सब एकजुट होकर खड़े होंगे, तो कोई भी ताकत हमारे संविधान और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा सकती।”

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