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पुलिस के खिलाफ शिकायत कैसे की जा सकती है? जानिए क्या है प्रावधान

  प्रकाश सिंह के मामले में भारत के उच्चतम न्यायालय में प्रत्येक राज्य के लिए एक पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के गठन का दिशा निर्देश दिया है। ऐसी अथॉरिटी स्वतंत्र संस्था होती है, यह अथॉरिटी राज्य सरकार के अधीन नहीं होती है और पुलिस का इसमें कोई दखल नहीं होता है। इस अथॉरिटी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं। जब किसी भी व्यक्ति को किसी पुलिस अधिकारी द्वारा अनावश्यक परेशान किया जा रहा है, किसी मुकदमे में झूठा फंसाने की धमकी दी जा रही है, उसकी की गई शिकायत को दर्ज नहीं किया जा रहा है, उसके बदले उससे रिश्वत मांगी जा रही है, किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध अनुसंधान नहीं किया जा रहा है जिस व्यक्ति के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट की गई है, किसी व्यक्ति को किसी मामले से हटा दिया गया है। उसके विरुद्ध चालन पेश नहीं किया गया है, ऐसे बहुत सारे आचरण है जो पुलिस को साफ रखने होते हैं, लेकिन अगर पुलिस अपने सिद्धांतों पर अटल नहीं रहती है और कोई पुलिस अधिकारी इनके विपरीत जाकर कोई कार्य करता है तब पुलिस शिकायत अथॉरिटी में उसकी शिकायत की जा सकती है। 



  कौन कर सकता है शिकायत 
 कोई भी ऐसा व्यक्ति जो पुलिस के किसी अधिकारी द्वारा पीड़ित किया जा रहा है वह अथॉरिटी के समक्ष उस अधिकारी की शिकायत कर सकता है। ऐसी शिकायत उसे एक लिखित आवेदन के माध्यम से करनी होती है, एक पीड़ित व्यक्ति की ओर से उसके परिवार के लोग भी ऐसी शिकायत कर सकते हैं। अथॉरिटी को इस बात का संज्ञान दे सकते हैं कि उसके व्यक्ति को किस तरह से परेशान किया जा रहा है और उससे किस प्रकार से रिश्वत मांगी जा रही है। 
  पर्याप्त साक्ष्य 
 पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के समक्ष किसी भी पुलिस अधिकारी की शिकायत करने के लिए शिकायतकर्ता के पास पर्याप्त साक्ष्य होना चाहिए। अगर वह कोई अधिकारी की शिकायत कर रहा है तब उस शिकायत से संबंधित ऐसे साक्ष्य उपलब्ध है जिससे यह साबित होता है कि पुलिस अधिकारी का आचरण अनैतिक रहा है तब शिकायतकर्ता की बात को मान लिया जाता है। अगर कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है तब उसकी शिकायत को खारिज कर दिया जाता है। ऐसे साक्ष्य में गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य दोनों शामिल होते हैं। किन्ही गवाहों के माध्यम से भी यह साबित किया जा सकता है कि किसी पुलिस अधिकारी का आचरण अनैतिक है। 
  क्या होते हैं परिणाम 
 जब कभी पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के समक्ष कोई शिकायत दर्ज करवाई जाती है उस शिकायत पर जांच के बाद अथॉरिटी यह देखती है कि क्या ऐसे सबूत उपलब्ध हैं, जिससे यह साबित होता है कि किसी पुलिस अधिकारी का आचरण अनैतिक है। तब अथॉरिटी उस पुलिस अधिकारी के विरुद्ध एक्शन लेते हुए एफआईआर दर्ज करने तक का आदेश कर देती है। ऐसे निर्देश के बाद से अब तक भारत के सभी राज्यों ने इस अथॉरिटी को नहीं बनाया है, क्योंकि इसके संबंध में सरकार पर बहुत दबाव है। पुलिस पर यदि अंकुश लगाने का प्रयास किया जाता है, तब राज्य की व्यवस्था बनाए रखना थोड़ा कठिन हो जाएगा। फिर भी भारत के 11 राज्यों में पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी का गठन कर दिया गया है। इन राज्यों में कोई पुलिस अधिकारी किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का अनैतिक आचरण जिसमें रिश्वतखोरी शामिल है जैसा कोई कार्य करता है तब उसकी शिकायत पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के समक्ष की जा सकती है और उस पर जांच चल सकती है। 
   वे सभी राज्य निम्न है-
असम, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, कर्नाटका, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, महाराष्ट्र, तेलंगाना। भारत के इन सभी राज्यों में पुलिस द्वारा पीड़ित कोई भी व्यक्ति पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। इस अथॉरिटी के मुख्यालय सभी राज्यों की राजधानी में स्थित है। ऐसी शिकायत वहां स्वयं उपस्थित होकर की जाती है इसके संबंध में ऑनलाइन व्यवस्था अब तक उपलब्ध नहीं है। जिन राज्यों में पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी जैसी सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं है वहां किसी भी पुलिस अधिकारी की शिकायत उससे उच्चतर पुलिस अधिकारी के समक्ष की जाती है। जैसे किसी थाना इंचार्ज से संबंधित शिकायत पुलिस अधीक्षक के समक्ष की जाती है, थाने के किसी कनिष्ठ पुलिस अधिकारी की शिकायत पुलिस थाना के इंचार्ज को की जाती है। यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी पुलिस अधिकारी की शिकायत से संबंधित कोई भी आवेदन सभी सबूतों के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए और कोई भी आरोप तब तक नहीं लगाया जाना चाहिए जब तक कोई भी आचरण कानूनी रूप से अवैध न हो।
  कितने पुलिस शिकायत प्राधिकरण हैं? 
 कानून के अनुसार, 2 पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया जाना चाहिए: 1.राज्य स्तर पुलिस शिकायत प्राधिकरण 2.जिले के लिए विभाग स्तर पुलिस शिकायत प्राधिकरण। 
 
कौन से कानून महाराष्ट्र राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के कामकाज को नियंत्रित करते हैं? 
 •महाराष्ट्र पुलिस (संशोधन और निरंतरता) अध्यादेश, 2014 (महाराष्ट्र का आठवां ] 5 अप्रैल 2014 को प्रकाशित हुआ था और इसे 1 फरवरी 2014 को प्रभावी माना गया था। • महाराष्ट्र संभाग स्तरीय पुलिस शिकायत प्राधिकरण (प्रशासन और प्रक्रिया) विनियम, 2018 • महाराष्ट्र सरकार संकल्प संख्या: एनपीसी-1008/2/सीआर-6/पीओएल-3, दिनांक 25 जुलाई, 2008 महाराष्ट्र सरकार संकल्प संख्या: पीसीए -1013/सीआर-109/पोल-3 दिनांक 15 जुलाई 2013 इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट का मामला जो शिकायत प्राधिकरण बनाने के लिए सरकार के पास लाया गया था: 22 सितंबर 2006 का निर्णय(2016)8 एससीसी में भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय की रिट याचिका (सिविल) में दर्ज किया गया था। प्रकाशसिंह और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य। 310/1996


महाराष्ट्र राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ( राज्य स्तर )
   महाराष्ट्र राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ( राज्य स्तर ) चौथी मंजिल , एमटीएनएल कूपरेज टेलीफोन एक्सचेंज बिल्डिंग , सामने । कूपरेज फुटबॉल ग्राउंड , महर्षि कर्वे रोड , नरीमन पॉइंट , मुंबई 400021 . 022-22820045 / 22820046 / 22820067 mahaspca@gmail.com

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