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आये आज जानते है, ताडी के बारे मे ताड़ी के फायदे और नुकसान - Tadi Peene ke Fayde

 ताडी के बारे मे 

ताड़ी के पेड़ के फल लगने वाले ऊपरी हिस्से के पास छीलकर मटकी टाँग कर नीर रस निकाला जाता है, इस नीर रस को गांव में ताड़ी नाम से ही ज्यादा जानते हैं|

ताडी का नशा आता है क्या?

 यह ताड़ी हल्का फुल्का नशीला पदार्थ भी है लेकिन फिर भी लोग गर्मी में बहुत ज्यादा पीना पसंद करते है ये  शरीर की गर्मी को शांत करने के साथ-साथ इससे पेट भी साफ रहता है, यह ताड़ी पेट से परेशान लोगों के लिए यह बहुत ही फायदेमंद साबित होता है|

हल्का फुल्का नशीला पदार्थ होने के बावजूद भी यहां गांव में पूरा परिवार एक साथ बैठकर पीते हैं स्वाद में हल्का खट्टापन होता है|

क्या है ताडी ?

  ताडी एक प्राकृतिक पोषक तत्वों से बना एक स्वास्थ पेय हैं । इसे प्राकृतिक शराब भी कहते हैं । ताडी में खमीर बनना याने फर्मेंटेशन होने के कारण कुछ मादक पेय पदार्थों की तुलना में ताडी में अल्कोहोल की मात्रा लगभग 8.1 बढ़ जाती हैं । 

ताजी ताडी कैसी लगती? 

  सुबह की ताजी ताडी मीठी रहती हैं , अधिक पोष्टिक रहती हैं, जो लोग नशा करते हैं  वो शाम की ताडी अधिक पसंद करते हैं दिनभर फर्मेंटेशन के कारण हल्का नशा होता हैं.. कुछ लोग ताडी के नाम से कैमिकल युक्त द्रव पदार्थ भी बेचते हैं...

ताडी का वैज्ञानिक नाम?

ताडी का वैज्ञानिक नाम - बोरासस फ्लेबेलिफ़र हैं यह एरेकेसी परिवार से आता हैं ।

जिसे तालपाम,वाइनपाम, ताडी पाम,लोंतार पाम,डबपाम,पल्मायरा पाम,आइसएप्पल, कहते । यह दक्षिण एशिया का मूलनिवासी फैन पाम हैं।

ताडी जैसै और क्या होता है?

ताडी कि तरह खजुर  (सिंदा) के पेड से भी ताडी निकाली जाती है जिसे सिंदा ताडी भी कहते है ताड से थोडी ज्यादा मात्रा में नशिली मानी जाती हैं!

ताडी को देश  के विभिन्न इलाकों में ताडी,तरकुल,नीरा,कल्लु ,कल, पाम वाइन,फैनी,सल्फी ( गोंडी में गोरगा ) नाम से जानते हैं । 


कौन चढ सकता है ताड पर ?

    ताड़ के पेड़ों पर हर कोई नही चढ सकता ,मतलब ताडी कोईभी नही उतार सकता ,यह कार्य केवल समाजके विशेष संप्रदाय के लोग ही करते हैं । 

     जैसे कि आप ओरिसा,आंध्र,तेलंगाना,छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश में जाते हैं तो आप ज्यादातर गोंड ,भील,माडिया जनजातिके लोगों को या किसी अन्य जनजातीय लोगों को ही ताड के पेड पर चढते हुये, ताडी बेचते हुए देख पाएंगे..क्योकि इसका भी एक विशेष पारंपरिक तरीका होता हैं ..जिसमे प्रकृतिकेप्रति आभार, आदर,सन्मान को दर्शाता हैं । 


मध्यप्रदेश में ताडी कहा मिलती हैं? 

    मध्यप्रदेश के झाबुआ, कुक्षी, बड़वानी,अलिराजपुर,छोटा उदेपुर,तथा गुजरात और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती इताके मे अधिक पाये जाते हैं, वही महाराष्ट्र सातपुडा क्षेत्र मे भी धुले जिले मे पाये जाती है!

    महाराष्ट्र के भामरागड तहसील में ,छत्तीसगढ़ के गोंड जनजाति के अधिक आबादी वाले बस्तर क्षेत्र में इसकी विशेष मान्यता है । 

    ताडी वाले सिझन में जितने भी प्राकृतिक आधार पर बने पारंपरिक तीज त्यौहारो पर ताडी का स्थान भी विशेष होता हैं । यह शोध का विषय हैं आप जानने,समझने का प्रयास अवश्य कर सकते है । 

   ताडी सिर्फ नशा नही हैं ,ताडी के बहुतसे फायदे भी हैं । सुबह की ताजा ताडी भरपूर पौष्टिक तत्वों का स्त्रोत हैं । ताडी में विटामिन बी,विटामिन सी,आयरन ,केल्शियम जैसे विटामिन,मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट ,एंजाइम भी होते हैं । जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं । खास कर महिलाओं की सभी प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बहुत ही लाभदायी होते हैं । जो थकान दूर करते हैं , भूख लगती हैं, शीतलता और ताकत मिलती हैं । प्रकृतिक ऊर्जा मिलती हैं । पाचनतंत्र मजबूत करता हैं, लेकिन इसकी अधिक मात्रा सेवन करने से दस्त,उल्टी,अस्वस्थता भी हो सकती हैं ।

   यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है, पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता है, त्वचा को नरमी और चमक देता है, वजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, और शरीर को ऊर्जा प्रदान कर सकता है। इसके अलावा, ताड़ी मधुमेह, गठिया, और कैंसर जैसी बीमारियों को रोकने में भी मदद कर सकती है।


ताड़ी के फायदे और नुकसान - Tadi Peene ke Fayde aur Nuksan in Hindi

कई अध्ययनों से पता चला है कि हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए पाम टोडी का सीमित मात्रा में सेवन करना फायदेमंद है। पाम टोडी का सेवन करने से दिल की विफलता और अन्य हृदय संबंधी बीमारियाँ होने की संभावना कम होती है। नीरा में पोटेशियम होता है, जो रक्तचाप को कम कर सकता है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है।



क्या ताड़ी हानिकारक है?

शरिर के लिये लिये कोई भी पेय पदार्थों को लिमिट से ज्यादा वाले तो थोड़ा-बहुत हानिकारक तो बनता ही है  ! प्राकृतिक ताड़ी, जिसे पाम वाइन भी कहा जाता है, के स्वास्थ्य लाभों पर बहस चल रही है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि इसके कुछ स्वास्थ्य लाभ हैं, 

जैसे प्रोबायोटिक्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होना। हालाँ कि, इसके अत्यधिक सेवन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कि लीवर की क्षति और लत लगने जैसी हानी हो सकती है। 

ताड़ी में नशा क्यों होता है?

ताड़ के पेड़ को देशज भाषा में तरकुल भी कहा जाता है. सुबह की ताज़ी ताड़ी नीरा (मिठी होती है)शीतलता की वजह से बतौर पेट की दवा बहुत पसंद की जाती है,भूख बढ़ाने वाली मानी जाती है तो शाम की ताड़ी दिन भर धूप खाने से हल्की नशे की सिफ़त वाली हो जाती है और हल्के नशे के तौर पर इसे लेने वाले शाम की ताड़ी  बहुत पसंद करते हैं.

Note- यह पोस्ट केवल आपके जानकारी के लिए लिखी हैं, नशापान को बढावा देना कतई मकसद नही हैं । 



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