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आदरणीय सांसद ॲड. गोवालजी पाडवी साहेब से सौजन्य मुलाकात, क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर विस्तृत चर्चा

 


आदरणीय सांसद.ॲड. गोवालजी पाडवी साहेब से सौजन्य भेंट, क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर विस्तृत चर्चा


शिरपूर तालुका के मौजे बाटवापाडा (आंबापाणी) में आदिवासी योद्धा क्रांतिवीर खाज्या नाईक का भव्य स्मारक बनाने की मांग को लेकर आदरणीय खा. ॲड. गोवालजी पाडवी साहेब से सौजन्य भेंट की गई। इस दौरान आदिवासी समाज और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई।



आदिवासी समाज को अभी भी कई बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें आवास, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बैंकिंग सुविधाएं शामिल हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। बैठक में क्षेत्र के विकास और लोगों की भलाई के लिए विभिन्न योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई।


बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे और उनकी जरूरत


1️⃣ क्रांतिवीर खाज्या नाईक का स्मारक निर्माण


मौजे बाटवापाडा (आंबापाणी) में आदिवासी योद्धा क्रांतिवीर खाज्या नाईक का भव्य स्मारक बनाने की मांग की गई। खाज्या नाईक ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया था और आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया था। इस स्मारक के माध्यम से उनकी वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकेगा और समाज में प्रेरणा का संचार होगा।


2️⃣ प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाने की मांग


प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को आवास बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। हालांकि, वर्तमान में इस योजना के तहत मिलने वाली राशि 1.20 लाख से 1.50 लाख रुपये तक सीमित है, जो कि पर्याप्त नहीं है। इसलिए यह मांग रखी गई कि इस राशि को कम से कम 2,50,000 रुपये तक बढ़ाया जाए, ताकि लाभार्थी इस राशि से मजबूत और टिकाऊ घर बना सकें।


3️⃣ आदिवासी क्षेत्रों में सांसद निधि से सोलर लाइट लगाने की मांग


ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बिजली की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई गांवों में अभी भी पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं हैं, जिससे रात में अंधेरे की वजह से दुर्घटनाओं और असुरक्षा का खतरा बना रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए सांसद निधि के माध्यम से इन क्षेत्रों में सोलर लाइट लगाने की मांग की गई, जिससे गांवों को रोशन किया जा सके।


4️⃣ मनरेगा मजदूरी समय पर दिलाने की मांग


महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत गरीब और अकुशल मजदूरों को वर्ष में 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। हालांकि, मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं होने से मजदूरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस योजना के तहत मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई।


5️⃣ आदिवासी किसानों को फसल ऋण उपलब्ध कराने की मांग


आदिवासी किसान जो वन भूमि पर खेती करते हैं, उन्हें राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों द्वारा फसल ऋण नहीं दिया जाता। इससे उन्हें खेती के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। इसे देखते हुए सभी बैंकों को यह निर्देश देने की मांग की गई कि वे आदिवासी किसानों को फसल ऋण की सुविधा दें, ताकि वे बिना किसी वित्तीय बोझ के अपनी खेती कर सकें।


6️⃣ मुंबई-आगरा हाईवे पर ट्रॉमा केयर सेंटर बनाने की मांग


मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-3) पर आदिवासी बहुल क्षेत्र मौजे सांगवी में एक ट्रॉमा केयर सेंटर बनाने की मांग की गई। यह हाईवे व्यस्त मार्गों में से एक है और यहां कई सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती। इस सेंटर के निर्माण से दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सकेगी और कई जानें बचाई जा सकेंगी।


7️⃣ सरकारी आश्रमशालाओं की पक्की इमारतें बनाने की मांग


मौजे जामण्यापाडा, अर्थे खुर्द, हिवरखेडा और उमर्दा की सरकारी आश्रमशालाओं की इमारतें अभी भी कच्ची हैं। बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ये इमारतें सुरक्षित नहीं होतीं, जिससे यहां पढ़ने वाले आदिवासी छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए इन आश्रमशालाओं की पक्की इमारतें बनाने की मांग की गई।


8️⃣ पेसा क्षेत्र में ट्रांसफर प्रक्रिया में नियमों का सख्ती से पालन


अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर पेसा (PESA) कानून लागू है, जिसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में कर्मचारियों के तबादले, नियुक्ति और अन्य प्रशासनिक फैसलों में ग्राम सभाओं को अधिकार दिया गया है। हालांकि, हाल ही में पेसा क्षेत्र में तबादला प्रक्रिया में राज्यपाल की अधिसूचना और 5 मार्च 2015 के शासन निर्णय का पालन नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर सख्त नियमों का पालन कराने की मांग की गई, ताकि आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा हो सके।


मांगों के समाधान की उम्मीद


इस बैठक में आदिवासी समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। ज्ञापन के माध्यम से इन समस्याओं के समाधान की मांग की गई। यह उम्मीद जताई गई कि संबंधित अधिकारी और शासन-प्रशासन जल्द ही इन मुद्दों पर ध्यान देंगे और उचित निर्णय लेंगे।


> "यह बैठक आदिवासी समाज के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न केवल उनकी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।"




आदिवासी समाज को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। यह भेंट और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया समाज के हर वर्ग की बेहतरी के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इन मांगों पर उचित कार्रवाई होगी और आदिवासी समाज को उनका हक और अधिकार मिलेगा।



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