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"देश के इतिहास के पन्नों में छुपाया हुवा आदिवासी योद्धाओं का इतिहास "

 

"देश के इतिहास के पन्नों में छुपाया गया आदिवासी योद्धाओं का इतिहास "

     गुजरात के अहमदाबाद के अलावा दाहोद जिले के जालोद, लिमडी, बारिया महिसागर जिले के संतरामपुर, मानगढ़, पोपटिया गढ़ पंचमहाल जिले के चांपानेर (पावागढ़), नर्मदा जिले के नांदोद (राजपिपळा), डांग जिले जैसे कई शहर / स्थानों को आदिवासी राजा / कबीलाई सरदारों ने बसाया है। इस तरह पूरे देश मे आदिवासी समुदाय के इतिहास की सूची बनाये तो बहुत लंबी कतार होगी। पर कही न कही आदिवासी समुदाय में अशिक्षा व उनके बोली/भाषा के मौखिक इतिहास के कारण बाहरी इतिहासकारो द्रारा लिखे गये उनके इतिहास के साथ सही न्याय नही हुआ। 

  सिर्फ़ गुजरात नही भारत के हर कोने कोने मे  आदिवासी योद्धाओं का इतिहास रहा है  सातपुडा में  खाज्या नाईक ,भिमा नाईक वीर बिरजू नायक  , सह्याद्री से राघोजी भांगरे  ,छितु किराड़े, इंडियन  रोबिन हुड टंट्या भील धरती आबा बिरसा मुंडा,राणी दुर्गावती, गोडवाना के रघुनाथ शाह ,शंकर शाह , विर बाला काली बाई भिल, डूंगरपुर के भील राजा, बांसवाड़ा के बांसिया भील ,भोपाल के कमलापति गोंड महारानी, मेवाड़ के महाराणा पुंजा भील, रेंगा कोरकू, झारखंड के जयपालसिंह मुंडा, मानगढ़ हत्याकांड,  ऐसे हजारों आदिवासी यौद्धाओं महापुरुषों को इतिहास में जगह नही दिया गया! 

   इसलिए अब आदिवासी समाज के शिक्षित युवाओं को उनके सही इतिहास को लोगो के सामने लाकर आदिवासी समुदाय के साथ न्याय करना होगा।





अहमदाबाद के राजा आदिवासी भील राजा आशावल भील स्टेचू अहमदाबाद

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