तळोदा : आदिवासी बोली संरक्षण एवं साहित्य परिषद की नई कार्यकारिणी समिति का गठन हाल ही में किया गया है। शहादा के बुद्ध विहार इलाके में हुई बैठक में बबन निकुंभ को अध्यक्ष चुना गया, जबकि दशरथ पावरा और भीमराज पावरा को उपाध्यक्ष चुना गया.
इस सम्मेलन का गठन लेखकों की बैठकें, सेमिनार आदि जैसे कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है।
बोली भाषा संरक्षण एवं साहित्य परिषद सम्मेलन के प्रस्ताव में सर्वसम्मति से बबन निकुम्भ को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। दशरथ पावरा, भीमराज पावरा को उपाध्यक्ष, कवि संतोष पावरा को सचिव, लक्ष्मण पावरा को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।
शहादा नगर की बैठक में कार्यकारिणी का चयन:
अध्यक्ष : बबन निकुम्भ
उपाध्यक्ष : दशरथ पावरा, भीमराज पावरा
सचिव : कवि संतोष पावरा
संयुक्त सचिव : लक्ष्मण पावरा
सदस्य के रूप में डाॅ. मोहन पावरा, डॉ. विजय सिंह पावरा, डाॅ. डी.एल पावरा, डॉ. भगत सिंह पाटले, चंपालाल निकुम, वनिता पाटले, प्रेम भंडारी, कैलास चौहान, मनोज पावरा आदि का चयन किया गया है।
मौखिक साहित्य संग्रह का उद्देश्य
जनजातीय बोलियों एवं साहित्य के अस्तित्व को देखते हुए आज बोलियों एवं जनजातीय साहित्य के सृजन की अत्यंत आवश्यकता है। इस सम्मेलन का उद्देश्य अधिक से अधिक आदिवासी मौखिक साहित्य एकत्र करना, आदिवासी कवियों और लेखकों को अपना साहित्य प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित करना, आदिवासी साहित्य के विरूपण को रोकना और आदिवासी मुद्दों को उस साहित्य में प्रस्तुत करना।
आदिवासी बोली, भाषा, साहित्य और संस्कृति को संरक्षित करना हम सभी आदिवासी समूहों की जिम्मेदारी है। आइए हम काम को मजबूती से शुरू करें, हम अपने अस्तित्व को बचाए रखने में अपनी भूमिका निभाने की बात रखी गई।
इस अवसर पर भीमराज पावरा द्वारा 'आदिवासी समजोन जिवाणो', कपिल निकुंभ द्वारा 'आदि मूळ धर्म' (संत गुलाम महाराज की जीवनी), प्रेम भंडारी द्वारा तीर कमान, कैलास चौहान द्वारा चलता चालू और संतोष पावरा द्वारा "हेमटु"(अतिक्रमण) की प्रस्तुति की गई। आदिवासी बोली भाषा संरक्षण एवं साहित्य सृजन परिषद आदि पुस्तकें प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रकाशित की गईं।
किताब के लिये संपर्क करें। श्री. भीमराज पावरा सर, 9764432338 कृपया इस पर संपर्क करें या यह ऑनलाइन उपलब्ध है और उक्त पुस्तक आप तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक वाहरू सोनवाने मुख्य मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित थे। नामदेव पटले, सुरेश मोरे, सुशीलकुमार पावरा, ईश्वर सालुंके, राजू डुडवे, राम सिंह डुडवे, मनीषा पावरा,राजेश पावरा, मनोज पावरा,शिवाजी पावरा, कैलास बारेला, चुत्रीलाल ब्राह्मणे एव अन्य लोगों सहित साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे।



1 टिप्पणियाँ
Congratulations nikumbh Sir
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